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2006 से चली आ रही दुर्घटना सहायता योजना को बन्द न किया जाए
जीन्द विकास संगठन ने प्रदेश के मुख्यमन्त्री से की मांग
2006 से चली आ रही दुर्घटना सहायता योजना को बन्द न किया जाए
दुर्घटना में मृत्यु होने पर सरकार द्वारा दी जाती थी 1 लाख रूपए की सहायता
जो पीडि़त परिवार के लिए बनती थी लाठी का सहारा
गत माह सरकार ने अधिसुचना जारी कर योजना को किया बन्द
जीन्द : जीन्द विकास संगठन के अध्यक्ष डा. राजकुमार गोयल ने प्रदेश के मुख्यमन्त्री मनोहर लाल को ट्वीट कर मांग की है कि 2006 से चली आ रही दुर्घना सहायता योजना को बन्द न किया जाए। यह योजना पीडि़त परिवार के लिए लाठी का सहारा बनती थी। इस योजना के तहत दुर्घटना में मृत्यु होने पर पीडि़त परिवार को 1 लाख रूपए की आर्थिक सहायता दी जाती थी।
गोयल का कहना है कि सरकार ने गत माह एक अधिसुचना जारी कर इस योजना को बन्द कर दिया है। इस योजना के तहत अब हरियाणा के वासी को दुर्घटना ग्रस्त होने पर कोई आर्थिक सहायता नहीं मिलेगी। अभी तक किसी भी प्रकार की दुर्घटना में मौत होने पर पीडि़त परिवार को 1 लाख रूपए की आर्थिक सहायता मिलती थी। यह योजना 2006 में शुरू हुई थी। इस योजना के तहत 18 से 60 वर्ष तक के व्यक्तियों को किसी भी प्रकार की दुर्घटना में स्थाई विकलांगता या मृत्यु की स्थिति में परिजनों को 1 लाख रूपए की आर्थिक सहायता का प्रावधान किया गया था। अप्रैल 2017 में सरकार ने इस योजना का नाम बदलकर डा. श्याम प्रसाद मुखर्जी दुर्घटना सहायता योजना कर दिया था। सरकार द्वारा नाम जरूर बदल दिया गया था लेकिन सहायता उसी प्रकार दी जा रही थी।
गोयल का कहना है कि अब 31 दिसम्बर 2020 को हरियाणा सरकार की तरफ से सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा अधिसुचना जारी की गई है जिसमें कहा गया है कि डा. श्याम प्रसाद मुखर्जी दुर्घटना सहायता योजना को 31 मार्च 2020 से बन्द कर दिया गया है। गोयल का कहना है कि यह योजना आम आदमी के लिए बड़ी फायदेमन्द थी। जब किसी परिवार के सदस्य की सड़क दुर्घटना में मौत हो जाती थी तो वह सदस्य तो वापिस नहीं लौटता था लेकिन सरकार द्वारा पीडि़त परिवार को 1 लाख रूपए की जो सहायता दी जाती थी वह गरीब आदमी के लिए लाठी का सहारा बनती थी। गोयल ने मुख्यमन्त्री मनोहर लाल से मांग की है कि जनहित में इस योजना को बन्द न किया जाए। इस योजना को पहले की तरह ही सुचारू रखा जाए।